स्वास्थ्य

अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं घुटनों का दर्द, कम उम्र के लोग भी हो रहे प्रभावित; जानें इसके कारण और बचाव के तरीके

घुटनों में दर्द की परेशानी को आमतौर पर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब युवा और कम उम्र के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, घंटों तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता वजन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा खेलकूद या अन्य गतिविधियों के दौरान लगी चोट भी घुटनों में दर्द का कारण बन सकती है।

कई बार घुटनों में होने वाला दर्द कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी जोड़ों की बीमारियों के कारण होने वाली परेशानी लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में लगातार दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घुटने शरीर के सबसे महत्वपूर्ण जोड़ों में से एक हैं। ये शरीर का भार संभालने के साथ चलने, दौड़ने, बैठने, खड़े होने और सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें लगातार दर्द रहने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।

घुटनों में दर्द होने से शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी असर

घुटनों में लगातार दर्द रहने पर व्यक्ति की सामान्य चाल प्रभावित हो सकती है। दर्द से बचने के लिए कई लोग चलते समय शरीर का वजन एक पैर से दूसरे पैर पर अधिक डालने लगते हैं। इससे चलने का तरीका बदल जाता है और कूल्हों, जांघों तथा पैरों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस में समय के साथ जोड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। इसलिए यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या बार-बार वापस आए तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

नियमित व्यायाम से मिल सकता है फायदा

घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधियां जरूरी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से जांघों की क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग मांसपेशियां मजबूत होती हैं। ये मांसपेशियां घुटनों को सहारा देने और जोड़ों की स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं।

इसके लिए रोजाना टहलना, हल्की साइकिलिंग और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, जिन लोगों को पहले से घुटनों में तेज दर्द या सूजन है, उन्हें कठिन व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए।

बढ़ता वजन भी घुटनों के लिए नुकसानदायक

शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों पर दबाव बढ़ा सकता है। खासकर चलने, उठने-बैठने और सीढ़ियां चढ़ने के दौरान जोड़ों को अधिक भार सहना पड़ता है। मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम को भी बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।

इसलिए संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखना घुटनों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

गलत जूतों का चुनाव भी बढ़ा सकता है परेशानी

घुटनों की देखभाल में जूतों का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। गलत फिटिंग वाले जूते या लंबे समय तक असुविधाजनक ऊंची हील पहनने से चलने का तरीका प्रभावित हो सकता है। इससे पैरों और घुटनों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

ऐसे जूते पहनने चाहिए जो पैरों में सही फिट हों और पर्याप्त सपोर्ट प्रदान करें। जिन लोगों को पहले से जोड़ों की समस्या है, उन्हें फुटवियर चुनते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अगर घुटनों में लगातार दर्द, सूजन, लालिमा या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच से दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

ध्यान दें: घुटनों का दर्द हमेशा गठिया या ऑस्टियोआर्थराइटिस का संकेत नहीं होता। चोट, मांसपेशियों की कमजोरी और अन्य जोड़ों से जुड़ी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए बिना जांच के खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

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Author: Shubham Negi
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