इससे एक दिन पहले ही रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन एक लाख टन से अधिक क्रूड ऑयल लेकर मंगलूरू पहुंचा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, लेकिन भारत ने अपनी रणनीतिक कूटनीति के दम पर राहत हासिल की है। अमेरिका और रूस से तेल और गैस की आपूर्ति देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दे रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात बिगड़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। अमेरिका से एलपीजी लेकर कार्गो जहाज ‘पिक्सिस पायनियर’ मंगलूरू बंदरगाह पहुंचा, जिससे देश में गैस आपूर्ति को राहत मिली है।
इससे एक दिन पहले ही रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन एक लाख टन से अधिक क्रूड ऑयल लेकर मंगलूरू पहुंच चुका है। लगातार मिल रही इन आपूर्तियों से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई जहाजों के फंसे होने से वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है। सप्लाई बाधित होने से कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इसी बीच मंगलूरू का रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। यहां देश की सबसे बड़ी भूमिगत एलपीजी स्टोरेज सुविधा मौजूद है, जो आपात स्थिति में गैस भंडारण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और रूस से मिल रही आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखेगी।
कुल मिलाकर, वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता और रणनीतिक तैयारियों के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने में सफल होता दिख रहा है।




