स्वास्थ्य

सिर्फ स्वाद नहीं, दवा भी है काली मिर्च, पाचन से इम्युनिटी तक असरदार

भारतीय रसोई में रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाले मसाले सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं। आयुर्वेद में ऐसे कई मसालों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है। इन्हीं में काली मिर्च और सफेद मिर्च भी शामिल हैं, जो पाचन से लेकर इम्युनिटी तक पर सकारात्मक असर डालती हैं।

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार काली मिर्च का उपयोग सदियों से सर्दी-खांसी, पाचन संबंधी समस्याओं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। इसमें पाया जाने वाला प्रमुख तत्व पाइपरीन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।

काली मिर्च: स्वाद के साथ सेहत का साथी
विशेषज्ञों का मानना है कि काली मिर्च केवल मसाला नहीं, बल्कि एक प्रभावी घरेलू उपचार भी है। यह पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है। गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी यह राहत पहुंचाती है। आयुर्वेद में इसे भूख बढ़ाने और आंतों को सक्रिय रखने वाला बताया गया है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन शरीर में फैट सेल्स बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।

सर्दी-खांसी और इम्युनिटी में असरदार
काली मिर्च में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। शहद के साथ इसका सेवन गले की खराश, खांसी और जुकाम में राहत देता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं, जिससे इम्युनिटी मजबूत होती है।

सफेद मिर्च भी गुणों में किसी से कम नहीं
काली मिर्च की तरह सफेद मिर्च भी आयुर्वेद में उपयोगी मानी जाती है। इसमें एसेंशियल ऑयल, अल्कलॉइड, पाइपरीन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं। कुछ शोधों में इसके एंटी-ट्यूमर गुणों का भी उल्लेख मिलता है।

आहार विशेषज्ञों के अनुसार सफेद मिर्च का सीमित मात्रा में सेवन लाभकारी होता है। इसे शहद या दूध के साथ लिया जा सकता है। हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।

सफेद मिर्च में मौजूद फ्लेवोनोइड्स हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। इसमें विटामिन-ए भी पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए उपयोगी है। इसके नियमित सेवन से आर्थराइटिस, अपच, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल और आयुर्वेदिक रिपोर्ट्स में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। किसी भी औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।

(साभार)

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Author: Shubham Negi
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